यह सवाल बहुत से लोग पूछते हैं, अक्सर धीमी आवाज़ में, जैसे पूछना ही ग़लत हो। “भैया, kya Hindu attar laga sakte hain?” बहुत से लोगों को लगता है कि इत्र सिर्फ़ मस्जिद, दरगाह या ईद की चीज़ है। तो आज यह बात साफ़ कर लेते हैं, आराम से और इज़्ज़त के साथ। छोटा जवाब है: हाँ, बिल्कुल। और लंबा जवाब इससे भी ज़्यादा ख़ूबसूरत है।
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पूजा और रोज़ के इत्र
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English में पढ़ें: Who Can Wear Attar? A Fragrance for Everyone
Kya Hindu attar laga sakte hain: सीधा जवाब
हाँ। इत्र एक खुशबू है, किसी एक धर्म की चीज़ नहीं। इसे लगाने पर किसी धर्म की कोई रोक नहीं है। हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, हर कोई इत्र लगाता है, और सदियों से लगाता आया है।
इत्र असल में तेल में बसी खुशबू है। इसमें alcohol नहीं होता, और इसे spray नहीं करते, बस एक-दो बूँद लगाते हैं। इसीलिए बहुत से परिवार पूजा या किसी पवित्र मौक़े पर alcohol वाले spray की जगह तेल वाला इत्र पसंद करते हैं। इत्र क्या होता है और कैसे बनता है, यह हमने इत्र क्या है वाले लेख में विस्तार से बताया है।
अगर आपके परिवार या आपके मंदिर की कोई अपनी ख़ास परंपरा है, तो उसी का पालन कीजिए। यहाँ हम कोई धार्मिक फ़ैसला नहीं सुना रहे, सिर्फ़ यह बता रहे हैं कि इत्र हमारी संस्कृति में कहाँ-कहाँ बसा है।
भारतीय और हिंदू परंपरा में सुगंध
हमारे यहाँ खुशबू पूजा का हिस्सा हमेशा से रही है। “सुगंध” ख़ुद संस्कृत का शब्द है। पूजा के जाने-माने पंचोपचार में गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य आते हैं, और इनमें गंध यानी सुगंध, आमतौर पर चंदन, पहले आती है।
- चंदन: भगवान को चंदन का लेप, माथे पर चंदन का तिलक। चंदन की खुशबू मंदिरों की सबसे पहचानी खुशबू है।
- गुलाब: गुलाब की पंखुड़ियाँ और गुलाब जल, पूजा से लेकर शादी तक।
- मोगरा: मोगरे का गजरा और मोगरे की माला, ख़ासकर दक्षिण भारत के मंदिरों और घरों में।
- केवड़ा: मीठी, हरी सी फूलों की खुशबू, जो त्योहार की मिठाइयों और पकवानों में भी जानी-पहचानी है।
और फिर है Uttar Pradesh का कन्नौज, जो सदियों से इत्र का शहर कहलाता है। वहाँ के गुलाब, मोगरा, केवड़ा और मिट्टी के इत्र लंबे समय से देश भर के घरों, त्योहारों और पूजा तक पहुँचते रहे हैं। यानी इत्र भारत में बाहर से आई कोई अजनबी चीज़ नहीं, यह यहीं की मिट्टी में रचा-बसा है।
दरगाह, मंदिर और हमारी साझी विरासत
“इत्र” शब्द अरबी और फ़ारसी से आया, और “सुगंध” संस्कृत से। हिंदुस्तान में दोनों परंपराएँ आपस में ऐसे घुल-मिल गईं कि आज इन्हें अलग करना मुश्किल है।
सूफ़ी दरगाहों पर गुलाब के फूल, चादर और इत्र चढ़ाने की पुरानी रिवायत है, और वहाँ हर धर्म के लोग सिर झुकाने आते हैं। उधर मंदिरों में चंदन और फूलों की खुशबू बसी रहती है। इसे ही गंगा-जमुनी तहज़ीब कहते हैं।
Hyderabad में तो यह रोज़ दिखता है। दीवाली पर तोहफ़े में इत्र, ईद पर इत्र, शादी में मेहमानों के स्वागत में इत्र। हमारी दुकानों पर हर समुदाय के लोग इत्र लेने आते हैं, और सवाल धर्म का नहीं, पसंद का होता है: कौन सी खुशबू आप पर अच्छी लगेगी।
पूजा के लिए कौन से इत्र अच्छे रहते हैं
पूजा के लिए आमतौर पर वही खुशबुएँ चुनी जाती हैं जो पहले से मंदिरों में बसी हैं: चंदन, गुलाब, मोगरा और हल्के फूल। हमारे यहाँ से कुछ अच्छे विकल्प:
- मोगरा: PV Mogra Attar, जिसका मुख्य note Indian jasmine है। साफ़, सफ़ेद फूलों वाली खुशबू (from ₹99)।
- मोतिया: PV Motia Attar, jasmine और sandalwood का मेल। फूल और चंदन एक साथ (from ₹99)।
- गुलाब: PV Ruh Gulab Attar, जिसका मुख्य note Damask rose है (from ₹299)।
- चंदन: PV Sandal Special Attar में फूल, मसाले और लकड़ी के notes से शुरुआत होती है, बीच में amber और sandalwood, और आख़िर में musk (from ₹299)। ज़्यादा साफ़ चंदन चाहिए तो PV Ruh Sandal Attar देखिए, जिसके notes sandalwood और water हैं (from ₹499)।
- मजमुआ: PV Majmua Attar, फूल, लकड़ी और musk का हल्का मेल, जो पूजा और रोज़ दोनों में चलता है (from ₹99)।
पूजा, आरती और प्रार्थना के लिए और सुझाव हमारे Attars for Pooja and Prayer लेख में हैं।
रोज़ाना लगाने के लिए इत्र
पूजा के अलावा, इत्र रोज़ office, college या किसी के घर जाने से पहले भी उतना ही अच्छा है। यह शरीर के पास रहता है, इसलिए आसपास के लोगों को भारी नहीं लगता।
- हल्की, ताज़ा खुशबू के लिए: PV Mogra और PV Majmua, गर्मियों में भी आसान। सिर्फ़ एक बूँद काफ़ी है।
- महिलाओं के लिए फूलों वाली खुशबू: PV Jasmine Attar bergamot, neroli और lemon से खुलता है, बीच में orange blossom, jasmine, tuberose और ylang-ylang, और नीचे beeswax, tolu balsam, tonka bean और white woods (from ₹99)।
- सर्दियों के लिए गरम खुशबू: PV Hina Attar bergamot और magnolia से शुरू होता है, बीच में henna, jasmine, rose और white musk, और आख़िर में sandalwood (from ₹149)।
इत्र कैसे लगाएँ
- नहाने के बाद: साफ़ और सूखी त्वचा पर लगाइए, जब त्वचा थोड़ी गरम हो।
- कहाँ लगाएँ: कलाई, कान के पीछे और गले के पास। एक-दो छोटी बूँद काफ़ी है।
- रगड़ें नहीं: कलाइयों को आपस में रगड़ने से ऊपर के notes जल्दी उड़ जाते हैं।
- पूजा की थाली के लिए: रुई के छोटे फाहे पर एक बूँद इत्र लगाकर रखिए। तेल वाला फाहा दीये की लौ से दूर रखें।
- भगवान की मूर्ति या तस्वीर पर: यह अपने घर या मंदिर की परंपरा के हिसाब से कीजिए। कई मंदिरों के अपने नियम होते हैं, पहले पूछ लेना अच्छा है।
- कपड़ों पर: पहले किसी छुपी जगह पर थोड़ा लगाकर देख लें कि दाग़ तो नहीं पड़ता।
पूरा तरीका हमारे इत्र लगाने का सही तरीका वाले लेख में है। और अगर आपके मुसलमान दोस्त alcohol वाले सवाल पर बात कर रहे हों, तो Is Attar Halal? लेख में वह पूरी बात समझाई गई है।
पहले लगाकर देखिए
हर इत्र हर किसी की त्वचा पर एक जैसा नहीं खुलता। इसलिए हम हमेशा कहते हैं कि पहले लगाकर देखिए। Hyderabad में हमारी तीनों दुकानें, Mehdipatnam, Tolichowki और Shaikpet, रोज़ सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक खुली रहती हैं। वहाँ आप कोई भी इत्र counter पर लगाकर देख सकते हैं।
Online मँगवाना हो तो 3ml की छोटी शीशी सबसे सस्ता तरीका है, ताकि पहले खुशबू परख लें। हमारे इत्र 3ml, 6ml, 12ml और 24ml में आते हैं। पूरे भारत में delivery 4 से 7 दिन में होती है, और ₹3,000 या उससे ज़्यादा के order पर shipping free है। कोई सवाल हो तो WhatsApp कीजिए: 9059069188।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Kya Hindu attar laga sakte hain?
हाँ, बिल्कुल। इत्र एक खुशबू है और इसे लगाने पर किसी धर्म की कोई रोक नहीं है। भारत में हिंदू परिवार सदियों से चंदन, गुलाब, मोगरा और केवड़े की खुशबू पूजा और त्योहारों में इस्तेमाल करते आए हैं।
क्या पूजा में इत्र इस्तेमाल कर सकते हैं?
हाँ, बहुत से घरों में पूजा की थाली में इत्र रखा जाता है, अक्सर रुई के फाहे पर एक बूँद। चंदन, गुलाब और मोगरा पूजा के लिए सबसे आम पसंद हैं। मूर्ति पर लगाने से पहले अपने घर या मंदिर की परंपरा देख लें।
क्या इत्र में alcohol होता है?
नहीं। इत्र तेल पर बना होता है और इसमें alcohol नहीं होता। Alcohol perfume spray में होता है, इत्र में नहीं।
पूजा के लिए सबसे अच्छा इत्र कौन सा है?
इसका एक जवाब नहीं है। ज़्यादातर लोग चंदन, गुलाब या मोगरा चुनते हैं, क्योंकि ये खुशबुएँ पहले से मंदिरों में बसी हैं। हल्की और मीठी फूलों वाली खुशबू पूजा के माहौल के साथ सबसे अच्छी लगती है।
क्या इत्र किसी एक धर्म की चीज़ है?
नहीं। “इत्र” शब्द अरबी-फ़ारसी से आया, पर खुशबू की परंपरा भारत में उससे भी पुरानी है। मंदिर, दरगाह, शादी और त्योहार, हर जगह इत्र हमारी साझी विरासत का हिस्सा है।






