इत्र हमारे यहाँ इतना पुराना और इतना घरेलू है कि बहुत कम लोग रुककर सोचते हैं कि यह असल में है क्या। शादी के कार्ड पर इत्र, जुमे को इत्र, पूजा की थाली में इत्र, दादा जी की अलमारी से आती गुलाब और चंदन की खुशबू। तो आज बैठकर आराम से समझते हैं कि itra kya hai, यानी इत्र क्या होता है, यह शब्द कहाँ से आया, यह बनता कैसे है, और इसकी कौन-कौन सी किस्में हैं।
English में पढ़ें: Traditional Attars Explained
“इत्र” शब्द कहाँ से आया
इत्र अरबी शब्द “इत्र” (ʿiṭr) से आया है, जिसका मतलब है खुशबू या सुगंध। यह शब्द फ़ारसी से होते हुए हिंदी और उर्दू में आया, और फिर यहीं से अंग्रेज़ी में “attar” बना। इसीलिए आप इसे इत्र, इतर, अत्तर या attar, किसी भी नाम से सुनें, बात एक ही चीज़ की है।
Itra kya hai: इत्र असल में है क्या
सीधी भाषा में, इत्र तेल में बसी हुई खुशबू है। इसमें alcohol नहीं होता। पारंपरिक इत्र में फूल, जड़, मसाले या मिट्टी की खुशबू भाप के ज़रिए निकालकर चंदन के तेल में उतारी जाती है। चंदन का तेल खुशबू को पकड़कर रखता है और उसे नरम बनाता है। जब कोई तेल बिना चंदन के, सीधे फूल या जड़ से निकाला जाता है, तो उसे पारंपरिक तौर पर रूह कहते हैं, जैसे रूह गुलाब या रूह ख़स।
कन्नौज और देग-भपका का तरीका
Uttar Pradesh का कन्नौज शहर सदियों से इत्र के लिए मशहूर है। “Kannauj Perfume” को GI tag भी मिला हुआ है। वहाँ आज भी बहुत से कारीगर पुराने देग-भपका तरीके से इत्र बनाते हैं। यह तरीका कुछ यूँ है:
- देग: ताँबे का एक बड़ा बर्तन, जिसमें पानी और ताज़े फूल या बाक़ी सामान भरा जाता है। ढक्कन को मिट्टी से सील कर दिया जाता है ताकि भाप बाहर न निकले।
- आँच: देग को नीचे से धीमी आँच पर गरम किया जाता है। फूलों की खुशबू भाप के साथ ऊपर उठती है।
- चोंगा: बाँस की एक नली, जो भाप को देग से भपके तक ले जाती है।
- भपका: ताँबे का दूसरा बर्तन, जिसमें पहले से चंदन का तेल भरा होता है और जो ठंडे पानी में रखा रहता है। भाप यहाँ ठंडी होकर पानी बनती है और खुशबू चंदन के तेल में समा जाती है।
यह काम घंटों चलता है और कई बार दोहराया जाता है, जब तक तेल में खुशबू अच्छी तरह न बस जाए। इसी तरीके से कन्नौज में मिट्टी का इत्र भी बनता है। मिट्टी को पकाकर उसके टुकड़े देग में डाले जाते हैं, और जो खुशबू निकलती है वह बिल्कुल पहली बारिश में भीगी मिट्टी जैसी होती है।
इत्र की मुख्य किस्में
हमारे यहाँ इत्र को मौसम के हिसाब से “ठंडे” और “गरम” में बाँटा जाता है। गुलाब, मोगरा, केवड़ा और ख़स गर्मियों के, और musk, अंबर, केसर, हिना और शमामा सर्दियों के माने जाते हैं। यह खुशबू के मिज़ाज की बात है, किसी दवा वाले असर की नहीं।
फूलों वाले इत्र
- गुलाब: सबसे पुराना और सबसे पसंदीदा। रूह गुलाब इसकी सबसे ख़ालिस शक्ल मानी जाती है। हमारे यहाँ PV Ruh Gulab Luxe Attar (from ₹749) देखिए।
- मोगरा: गर्मियों की शामों वाली सफ़ेद फूलों की खुशबू। PV Mogra Attar (from ₹99) से शुरू कर सकते हैं।
- केवड़ा: मीठी, हरी सी फूलों की खुशबू, जो बिरयानी और मिठाई में भी जानी-पहचानी है।
मिट्टी और जड़ों वाले इत्र
- मिट्टी: पहली बारिश की सौंधी खुशबू, जैसा ऊपर बताया।
- ख़स: ख़स की जड़ से बनने वाली हरी, ठंडक भरी, थोड़ी मिट्टी जैसी खुशबू। PV Ruh Khus Attar (from ₹369) इसी परिवार का है।
गरम इत्र
- शमामा: एक नहीं, बहुत सारी जड़ी-बूटियों, मसालों, जड़ों और रेज़िन का मिश्रण, जिसे चंदन के तेल में पकाया जाता है। गहरी, मसालेदार और गरम खुशबू। PV Ruh Shamama Amber Attar (from ₹749) देखिए।
- हिना: यह भी जड़ी-बूटियों और मसालों वाला गरम इत्र है, जो सर्दियों में ख़ूब लगाया जाता है। PV Hina Attar (from ₹149) आज़मा सकते हैं।
Oud और musk
Oud अगर की लकड़ी से आता है और इसकी खुशबू गहरी, लकड़ी जैसी और थोड़ी धुएँ वाली होती है। हमारी पूरी oud range में हल्के से लेकर भारी तक, हर तरह के oud हैं। Musk साफ़, नरम और त्वचा जैसी खुशबू देता है। पुराने ज़माने में कस्तूरी हिरण से मिलती थी, पर आज भारत में कस्तूरी हिरण क़ानूनन संरक्षित है और उसका व्यापार प्रतिबंधित है। आज के musk इत्र दूसरी चीज़ों से बनाए जाते हैं।
मिले-जुले इत्र
कुछ इत्र कई इत्रों को मिलाकर बनते हैं। सबसे मशहूर है मजमुआ, जिसका मतलब ही है “संग्रह”। पारंपरिक मजमुआ में केवड़ा, कदम, मिट्टी और ख़स जैसी खुशबुएँ चंदन पर मिलाई जाती हैं। हमारे यहाँ PV Majmua Attar (from ₹99) रोज़ के लिए अच्छा विकल्प है।
इत्र और perfume में फ़र्क़
| बात | इत्र | Perfume spray |
|---|---|---|
| आधार | तेल | Alcohol |
| लगाने का तरीका | उँगली या डंडी से एक-दो बूँद | Spray |
| खुशबू का फैलाव | शरीर के पास रहती है | आसपास जल्दी फैलती है |
| कितना लगता है | बहुत थोड़ा | कुछ spray |
दोनों अपनी जगह अच्छे हैं। पूरी तुलना के लिए हमारा attar vs perfume page पढ़िए।
इत्र कौन लगाता है
हर कोई। मर्द, औरतें, बुज़ुर्ग, नौजवान। Hyderabad में ही देख लीजिए: ईद पर इत्र, दीवाली पर तोहफ़े में इत्र, शादी में मेहमानों के स्वागत में इत्र, पूजा में इत्र, और बहुत से लोगों के लिए रोज़ office जाने से पहले एक बूँद इत्र। यह किसी एक समुदाय की चीज़ नहीं, यह हमारी साझी विरासत है।
अगर आप पहली बार ले रहे हैं, तो हमारी किसी भी दुकान पर कुछ इत्र लगाकर देखिए और जो आप पर अच्छा खुले, वही चुनिए।
यह भी पढ़ें: इत्र लगाने का सही तरीका, असली इत्र की पहचान कैसे करें और बखूर जलाने का तरीका।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Itra kya hai, आसान शब्दों में?
इत्र तेल में बसी खुशबू है, जिसमें alcohol नहीं होता। पारंपरिक इत्र में फूल, जड़ या मसालों की खुशबू भाप से निकालकर चंदन के तेल में उतारी जाती है। इसे spray नहीं करते, बूँद भर लगाते हैं।
इत्र कैसे बनता है?
पारंपरिक तरीका देग-भपका है। ताँबे की देग में फूल और पानी गरम होते हैं, भाप बाँस की नली से होकर भपके में जाती है, जहाँ चंदन का तेल रखा होता है। भाप ठंडी होती है और खुशबू तेल में बस जाती है। आज बहुत से इत्र modern तरीकों से भी बनते हैं।
इत्र और attar में क्या फ़र्क़ है?
कोई फ़र्क़ नहीं। दोनों एक ही शब्द हैं। Attar अंग्रेज़ी में लिखा जाने वाला रूप है, जो इसी इत्र शब्द से बना है।
कन्नौज का इत्र इतना मशहूर क्यों है?
कन्नौज में सदियों से इत्र बन रहा है और वहाँ आज भी देग-भपका का पुराना तरीका चलता है। “Kannauj Perfume” को GI tag भी मिला है, जो इसकी पहचान को मान्यता देता है।
सबसे अच्छा इत्र कौन सा है?
इसका एक जवाब नहीं है। गर्मियों में गुलाब, मोगरा या ख़स अच्छे लगते हैं, सर्दियों में शमामा, हिना, oud या musk। सबसे अच्छा वही है जो आपकी skin पर अच्छा खुले, इसलिए लगाकर देखना ज़रूरी है।